आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी महामुनिराज की करुणामयी भावनाएं साकार हुई और प्रारंभ हुआ…
एक ऐसा प्रकल्प, जहां शोषण नहीं पोषण होता है : सात्विक विचार, सात्विक पहनावा, सात्विक भोजन, सात्विक जीवन शैली और सबके साथ सबके विकास के भाव का….
चल-चरखा महिला प्रशिक्षण व रोजगार केंद्र की यही यात्रा नित-नवीन प्रयासों के द्वारा अनवरत प्रवाहमान है।
“यहाँ जीवन का निर्वाह नहीं, निर्माण होता है “
सेवा-समर्पण-सद्भावना के बढ़ते कदम…
9 मई 2016
9 मई 2016
छत्तीसगढ़ जिले में स्थित है डोंगरगढ़ चंद्रगिरी क्षेत्र।यह आदिवासी बहुल क्षेत्र है| जहाँ हजारों की संख्या में पहले हथकरघा संचालित होते थे लेकिन वर्तमान में लुप्त प्रायः हो गए। ऐसी स्थिति में चल-चरखा केंद्र को आशीर्वाद देकर गुरुवर ने भारतीय कला और हथकरघा उद्योग को पुनः स्थापित किया है। चल-चरखा ने आदिवासी महिलाओं को रोज़गार उपलब्ध कराके जीवन को सुगम बना दिया ।
नर्मदा नदी के तट पर बसी ये उर्वरित भूमि पर आज अनेक महिलाओं को सुरक्षित और स्वावलंबी जीवन प्रदान करने के लिए अहिंसक व सात्विक वस्तुओं के उत्पादन हेतु चल-चरखा महिला हथकरघा प्रशिक्षण एवं रोज़गार केंद्र प्रतिभास्थली जबलपुर में संचालित हो रहा है।
यहाँ पर हथकरघा, कालीन बुनाई, आरी-ज़रदोज़ी , अग्नि-मृदा शिल्प आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है।
9 मई 2016
9 मई 2016
18 अप्रेल 2018
18 अप्रेल 2018
कारोपानी ग्राम मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले में स्थित है। यहां के पथरीले पहाड़ों में कृषि ना होने के कारण आय का कोई साधन नहीं था। रोजगार के अभाव में महिलाएं मजदूरी करने गांव से पलायन कर रहीं थी। ऐसे कठिनतम जीवन को सुगम बनाने के लिए खोला गया “चल-चरखा महिला प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र”। यहां आज लगभग 150 महिलाएं कार्यरत हैं एवं एक खुशहाल जीवन जी रही हैं।
रामटेक अपने स्वर्णिम इतिहास को लिए हुए एक धार्मिक नगरी है। यहाँ ग्रामीण महिलाओं को हथकरघा एवं काष्ठ शिल्प का प्रशिक्षण देकर आकर्षक उत्पाद यहाँ बनते है।
30 जून 2018
30 जून 2018
26 जुलाई 2018
26 जुलाई 2018
ललितपुर शहर में प्रतिभास्थाली प्रांगण में महिलाओं को हथकरघा पर वस्त्र बनाने का प्रशिक्षण देना और साथ ही उन्हें आरी ज़रदोज़ी का काम करने का अवसर प्रदान करना एक सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए महत्वपूर्ण कदम चल-चरखा केंद्र ने लिया। प्रतिभास्थाली की छात्राएं भी हथकरघा एवं हस्तशिल्प प्रशिक्षण के माध्यम से जीवनोपयोगी शिक्षा प्राप्त करते हैं।
खरगापुर, मध्य प्रदेश राज्य के टीकमगढ़ ज़िले में स्थित एक नगर है। यहाँ पहले महिलाओं को सूत कातने का प्रशिक्षण दिया गया और फिर चल-चरखा केंद्र द्वारा घर-घर में अम्बर-चरखे दिए गए। आज यह पूरा गाँव सूत कातने में कुशल है। उच्च गुणवत्ता वाला बारीक से बारीक सूत कातना इनके लिए सहज कार्य है। खादी के धागे का निर्माण करके यहाँ की महिलाएं बहुत गौरवान्वित महसूस करती हैं।
11 अगस्त 2018
11 अगस्त 2022
11 अगस्त 2022
अंतरिक्ष पार्श्वनाथ भगवान् की वरदानी छाँव में आचार्य भगवन् की प्रेरणा से शिरपुर की महिलाएं हथकरघा व हस्तशिल्प में अपने कौशल को उजागर कर अपनी प्रखर बुद्धि का परिचय देकर अपने जीवन को स्वावलंबी बना रही हैं।
नारी छत्तीसगढ़ जो की धान की खेती और गिट्टी की खदानों के लिए जाना जाता है, यहाँ की महिलाएं बहुत मेहनती है। खदान के अन्दर काम करते करते हथकरघा चलाना इनके लिए बहुत सहज और सुकून देता है। परम पूज्य आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी महराज की प्रेरणा से यहाँ हथकरघा के साथ-साथ आरी-ज़रदोज़ी से साड़ियों पर भी बहुत सुन्दर कार्य होता है।
10 मार्च 2023
10 मार्च 2023
22 अप्रेल 2023
22 अप्रेल 2023
आवाह देवी, बराड़ा, ककड़ियार
दिल्ली के तिहाड़ जेल की महिला कैदियों का जीवन कैद होते ही जीने की उमंग भी खो जाती है। जेल की मोटी-मोटी दीवारों में जहां सूर्य का प्रकाश भी दस्तक नहीं देता है, ऐसे अंधेरे जीवन में, ज्योतिर्मय पुंज को प्रज्वलित करने वाले प्रातः स्मरणीय गुरुवर श्री विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद से प्रवाहित है “चल-चरखा महिला प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र”। विदेशी महिलायें भी इस कार्य कौशल को सीख करके अत्यंत प्रसन्नता व संतुष्टि का अनुभव कर रही हैं । जेल में नियमित आय का साधन मिलने से अपने परिवार जनों को भी सहयोग दे पा रही हैं।
7 मई 2023
7 मई 2023
29 नवंबर 2023
29 नवंबर 2023
बुंदेलखंड के इस क्षेत्र में लुप्त होती कला को पुनर्जीवित करने एवं महिलाओं को सम्मानित जीवन जीने हेतु आचार्य गुरुवर के आशीर्वाद स्वरुप राहतगढ़ में हथकरघा केंद्र प्रारंभ किया गया। इसके माध्यम से यहाँ कार्यरत महिलाएं अपने दैनिक रोज़गार से न केवल अपना अपितु अपने परिवार जनों का भरण-पोषण करने में सहभागी बन चुकी हैं।
शिखरजी झारखंड प्रदेश में स्थित सिद्ध क्षेत्र है। यहां के पहाड़ी इलाके में आय का साधन न होने के कारण जीवन उदासीनता की ओर बढ़ गया, लेकिन जब गुरु कृपा बरसी तो पहाड़ी क्षेत्र में भी हरियाली हो गई। यहाँ महिलाओं ने आजीवन शाकाहार की जीवन शैली को चुना।
22 जनवरी 2024
22 जनवरी 2024