सशक्तिकरण, आत्मविश्वास और सम्मान के लिए…
श्रमशीला नारी
भारत गौरवशाली
धैर्य धारी चैतन्या
देश की कन्या
सृजनशील महिला
गतिशील भारत
सर्वगुणसंपन्न नारी शक्ति
भारत विकास की युक्ति
सशक्तिकरण, आत्मविश्वास और सम्मान के लिए…
यह एक प्रयास है,
संस्कृति के साथ जुड़ने का
स्वाश्रित जीवन जीने का
एक अवसर है,
प्रकृति के साथ रिश्ता निभाने का
चैतन्या की सृजनशीलता दिखाने का
एक प्रयोग है,
सादा जीवन उच्च विचार का
देश की कन्या के उच्च आचार का
एक चिंतन है,
सबके साथ सबके विकास का
सशक्त नारी समाज का...
एक एहसास है,
अपनेपन का...
और
स्वावलंबन का...
एक प्रयास
संस्कृति के साथ जुड़ने का
एक प्रयोग
सादा जीवन उच्च विचार का
एक चिंतन
सबके साथ सबके विकास का
एक एहसास
अपनेपन का...
एक प्रयास है...
संस्कृति के साथ जुड़ने का...
एक प्रयोग है,
सादा जीवन उच्च विचार का...
एक चिंतन है...
सबके साथ सबके विकास का...
एक एहसास है...
अपनेपन का...
एक प्रयास
संस्कृति के साथ जुड़ने का
एक प्रयोग
सादा जीवन उच्च विचार का
एक चिंतन
सबके साथ सबके विकास का
एक एहसास
अपनेपन का...
एक प्रयास है...
संस्कृति के साथ जुड़ने का...
एक प्रयोग है...
सादा जीवन उच्च विचार का...
एक चिंतन है...
सबके साथ सबके विकास का...
एक एहसास है...
अपनेपन का...

चल-चरखा

एक प्रयास है...
संस्कृति के साथ जुड़ने का...
एक प्रयोग है...
सादा जीवन उच्च विचार का...
एक चिंतन है...
सबके साथ सबके विकास का...
एक एहसास है...
अपनेपन का...
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एक प्रयास है,
संस्कृति के साथ जुड़ने का...
एक प्रयोग है,
सादा जीवन उच्च विचार का...
एक चिंतन है,
सबके साथ सबके विकास का...
एक एहसास है,
अपनेपन का...

हमारे सूत्रधार

दसों दिशाएं जिनका घर है,

प्राणी मात्र जिनका परिवार,

विश्व कल्याण की भावना जिनका धर्म है,

मन और इंद्रियों को जितना जिनकी साधना है और

आत्मा का अन्वेषण जिनका लक्ष्य है,

ऐसे युग पुरुष दिगंबराचार्य 108 श्री विद्यासागर जी महाराज की चिंतन धारा से पोषित है चल चरखा महिला प्रशिक्षण व रोजगार केंद्र।

प्रेरणा स्रोत

समाज में कमजोर वर्ग को सहयोग देकर उसे अपने जैसे बनाना, यह सभी लोगों का कर्तव्य है। अर्थ से नहीं किन्तु अर्थोपार्जन का साधन देकर सत्कर्म सिखाया जा सकता है। इसके लिए यह अहिंसक कार्य हथकरघा सर्वोत्तम माना गया है।

– युगदृष्टा जैनाचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज

5 मई 2015

5 मई 2015

जबलपुर, मध्य प्रदेश

चल-चरखा महिला हथकरघा प्रशिक्षण केंद्र प्रतिभास्थली में भी संचालित हो रहा है।

चंद्रगिरी, छत्तीसगढ़

आदिवासी महिलाओं को हथकरघा प्रशिक्षण दिया जाता है।

9 मई 2016

9 मई 2016

समर्पण की जीवंत मूर्ति

दीक्षा के उपरांत गुरुवर आचार्य श्री ज्ञानसागर जी की वृद्धावस्था एवं साइटिका से रुग्ण शरीर की मुनि विद्यासागर जी ने अपूर्व सेवा की। कडकडाती शीत हो या तमतमाती धूप मुनि विद्यासागर जी गुरुसेवा मे अहर्निश तत्पर रहते थे। 

आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज ने उन्हें आचार्य पद देने का विचार किया और अपने मनोभाव को विद्यासागर जी के समक्ष प्रकट किया किन्तु सांसारिक पद लिप्सा से निर्लिप्त मुनिश्री को ये बात कहाँ रुचने लगी।
किन्तु आचार्य ज्ञानसागर जी ने  कहा – “तुम्हें इस वृद्ध गुरु को निर्दोष संल्लेखना करानी है। आज गुरु दक्षिणा अर्पण करनी होगी, अत: आचार्य पद स्वीकारो”। गुरु-दक्षिणा की बात सुन कर मुनि विद्यासागर निरुत्तर हो गये।
तब धन्य हुई  वह घड़ी जब आचार्य श्री ज्ञानसागर जी ने अपने कर कमलों आचार्य पद पर मुनि श्री विद्यासागर महाराज को संस्कारित कर विराजमान किया एवं स्वयं आचार्य पद से नीचे उतर कर सामान्य मुनि के समान नीचे बैठ गए। 
गुरु के आदेश को हितकारी समझ भारी मन से उन्होंने ये आज्ञा शिरोधार्य की और तन-मन से गुरु सेवा करते हुए गुरूजी की संल्लेखना सम्पन्न करायी ।

भारतीय संस्कृति के पुरोधा महापुरुष

जन-जन के कल्याण की भावना संजोए महान संत का हृदय पाश्चात्य संस्कृति के गर्त में समाती भारतीय संस्कृति को बचाने और भारत को वापस लौटाने के लिये तड़प उठा और उठाया उन्होंने राष्ट्रहित में युगांतरकारी मशाल को पुन: प्रज्ज्वलित किया गया है। यथा-

कुशल संघ संचालक

आचार्य श्री जी का गुरुकुल:-

0

मुनि

0

आर्यिका

0

क्षुल्लक (साधक)

0

ऐलक (साधक)

0 +

ब्रह्मचारी – ब्रह्मचारिणियाँ

आपसे श्रमण-मुनियों ने आगमयुक्त चर्या को पालने में उत्साह, साहस, साधना, प्रेरणा को पाया है।

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प्रतिभावान दार्शनिक कवि

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चल चरखा

अतीत काल से ही भारत अपने वस्त्र निर्माण की कला के कारण पूरे विश्व में वस्त्र व्यापार का सिरमौर था, परंतु मशीनीकरण के इस दौर में हमने हस्तशिल्प को बहुत ठेस पहुंचाई है। परिणामस्वरूप भारत की आत्मा कहलाने वाले ग्रामीण क्षेत्र बेरोजगारी, गरीबी और पलायन जैसी गंभीर समस्याओं से जूझने लगे।

ऐसी अनेक समस्याओं के समाधान हेतू आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी महाराज की प्रेरणा और आशीर्वाद से नए भारत के निर्माण जुड़ा एक सुनहरा अध्याय- चलचरखा महिला प्रशिक्षण एवं रोज़गार केंद्र। यह आधुनिक परिवेश में कौशल, भारतीय संस्कृति और आत्मनिर्भरता का अनूठा संगम है।

कुशल संघ संचालक

आचार्य श्री जी का गुरुकुल:-

0

मुनि

0

आर्यिका

0

क्षुल्लक (साधक)

0

ऐलक (साधक)

0 +

ब्रह्मचारी – ब्रह्मचारिणियाँ

आपसे श्रमण-मुनियों ने आगमयुक्त चर्या को पालने में उत्साह, साहस, साधना, प्रेरणा को पाया है।

प्रेरणा स्रोत

समाज में कमजोर वर्ग को सहयोग देकर उसे अपने जैसे बनाना, यह सभी लोगों का कर्तव्य है। अर्थ से नहीं किन्तु अर्थोपार्जन का साधन देकर सत्कर्म सिखाया जा सकता है। इसके लिए यह अहिंसक कार्य हथकरघा सर्वोत्तम माना गया है।

– युगदृष्टा जैनाचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज

प्रेरणा स्रोत

समाज में कमजोर वर्ग को सहयोग देकर उसे अपने जैसे बनाना, यह सभी लोगों का कर्तव्य है। अर्थ से नहीं किन्तु अर्थोपार्जन का साधन देकर सत्कर्म सिखाया जा सकता है। इसके लिए यह अहिंसक कार्य हथकरघा सर्वोत्तम माना गया है।

– युगदृष्टा जैनाचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज

हमारे कार्यक्षेत्र

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सबके साथ सबके विकास का...
एक एहसास है,
अपनेपन का...
सशक्त नारी ही राष्ट्र के उत्थान की नींव है
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