
स्वदेशी की निरंतर यात्रा..
आचार्यश्री 108 विद्यासागरजी महाराज एवं आचार्यश्री 108 समयसागरजी महाराज के पावन आशीर्वाद से यह पहल निरंतर आगे बढ़ रही है और अनेक महिलाओं के जीवन में स्वावलंबन एवं सम्मान का मार्ग प्रशस्त कर रही है। यह पहल केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि स्वाभिमान, आत्मनिर्भरता और स्वदेशी के संकल्प को साकार करने की प्रेरणा है।
आइए, स्वदेशी को अपनाएँ और हाथकरघा व हस्तकला से जुड़ी इस प्रेरणादायक यात्रा का हिस्सा बनें।

