
आर.एस.एस के सह सरकार्यवाह…
चल चरखा के हर प्रयास को मिला श्री कृष्ण गोपालजी द्वारा एक गहरा संदेश—
यह केंद्र एक बीज है, जो कल वटवृक्ष बनकर जीवन सँवारेगा।
समाज में कमजोर वर्ग को सहयोग देकर उसे अपने जैसे बनाना, यह सभी लोगों का कर्तव्य है। अर्थ से नहीं किन्तु अर्थोपार्जन का साधन देकर सत्कर्म सिखाया जा सकता है। इसके लिए यह अहिंसक कार्य हथकरघा सर्वोत्तम माना गया है।
– युगदृष्टा जैनाचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज
अतीत काल से ही भारत अपने वस्त्र निर्माण की कला के कारण पूरे विश्व में वस्त्र व्यापार का सिरमौर था, परंतु मशीनीकरण के इस दौर में हमने हस्तशिल्प को बहुत ठेस पहुंचाई है। परिणामस्वरूप भारत की आत्मा कहलाने वाले ग्रामीण क्षेत्र बेरोजगारी, गरीबी और पलायन जैसी गंभीर समस्याओं से जूझने लगे।
ऐसी अनेक समस्याओं के समाधान हेतू आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी महाराज की प्रेरणा और आशीर्वाद से नए भारत के निर्माण जुड़ा एक सुनहरा अध्याय- चलचरखा महिला प्रशिक्षण एवं रोज़गार केंद्र। इन केंद्रों महिलाओं को हथकरघा, अंबर चरखा, कालीन व हस्तशिल्प कलाओं का निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। अल्प समय में महिलाएँ प्रशिक्षित होकर आत्मनिर्भर बनती हैं।यह आधुनिक परिवेश में कौशल, भारतीय संस्कृति और आत्मनिर्भरता का अनूठा संगम है।
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केंद्र
महिलाएँ प्रशिक्षित
हथकरघा संचालित
प्रशिक्षित महिलाओं ने प्रारंभ किए स्वयं के हथकरघा केंद्र
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चल चरखा के हर प्रयास को मिला श्री कृष्ण गोपालजी द्वारा एक गहरा संदेश—
यह केंद्र एक बीज है, जो कल वटवृक्ष बनकर जीवन सँवारेगा।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के समारोह पर
सेंट एलॉयसियस कॉलेज, जबलपुर के उत्साही विद्यार्थियों ने किया चल-चरखा केंद्र का विशेष भ्रमण।

दिल्ली भारत सरकार के सर्वोच्च पद पर आसीन उपराज्यपाल के द्वारा चल-चरखा महिला प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र, तिहाड़ जेल का उद्घाटन…